बड़ा हुआ तो क्या हुआ ,जैसे पेड़ खजूर|
पंथी को छाया नहीं, फल लागे अति दूर ||
गुरु गोविंद दोऊ खड़े ,काके लागूं पायॅ ।
बलिहारी गुरु आपने ,गोविंद दियो बताए ।।
राम नाम की लूट है, लूट सके तो लूट।
अंतकाल पछताएगा, प्राण जाएंगे छूट।।
माला तो कर में फिरे, जीव फिरे मुख माही । मनवा तो चहु दिसि फिरे, यह तो सुमिरन नाही।
:- कबीरदास
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